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PHP in Hindi | Page: 647 | Format: PDF

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PHP को Rasmus Lerdorf नाम के Canada निवासी Programmer ने विकसित किया था। वास्तव में Rasmus ने सबसे पहले Perl Scripts का एक समूह Create किया और उस Perl Scripts के समूह को “Personal Home Page Tools” (PHP Tools) नाम दिया था।

इस समूह को Rasmus ने अपने Personal Homepage Web Pages को Display व Maintain करने के लिए Develop किया था, जिस पर उनका Resume Uploaded था। जबकि Rasmus ने PHP की Public Announcing 8 June, 1995 को की।

बाद में Rasmus ने इन Scripts को CGI Binaries के रूप में “C” Programming Language में लिखा, ताकि इन Scripts द्वारा वे HTML Forms DBMS Software के साथ Communication कर सकें और इसी Scripts के समूह को “Personal Home Page/Forms Interpreter” या PHP/FI नाम दिया। इन Scripts का प्रयोग करके आसानी से Simple Dynamic Applications बनाए जा सकते थे। इसी PHP/FI के First Version को Rasmus ने 8 June 1995 को Publicly Announce किया था।

इस Release में वे सभी Basic Functionalities थीं, जो आज के PHP में हैं। इसमें Perl की तरह Variables थे तथा Form Handling की सुविधा व Embedded HTML की सुविधा थी। इसके Syntax पूरी तरह से Perl Language की तरह थे। PHP/FI के पहले दो Versions को Rasmus ने स्वयं ही Develop किया था, लेकिन तीसरे Version को Develop करने के लिए पूरी एक Team ने काम किया था। फलस्वरूप इस Scripting Language का नाम बदल कर “Preformatted Hypertext Preprocessor” रखा गया जिसका Short Form PHP है।

PHP के पांचवे Version तक PHP बिल्कुल भी Stable नहीं था, लेकिन पांचवे Version के आने के बाद आज सबसे ज्यादा Web Sites PHP पर Based हैं और PHP के 6th Version के Market में Launch होने की तैयारी चल रही है। लेकिन वास्तव में PHP है क्या? चलिए, जानने की कोशिश करते हैं।

Types of Programming Languages

Programming Languages मूलतः दो प्रकार की होती हैं:

Compiled Language
Interpreted Language

Compiled Languages ऐसी Programming Languages होती हैं, जिनके Programs जिस Computer Architecture (Intel, AMD Athelon, Solaris, Single Core, Dual Core Quad Core, x86, x64, …etc) व Operating System (Linux, Unix, Windows, MacOS, Wrap, OS/2, etc…) के लिए Develop किए जाते हैं, उन्हीं Computer Architecture के अनुसार पूरी तरह से Binary Codes में Convert हो जाते हैं।

यानी एक बार किसी Program को Compile कर देने के बाद उस Program के Source Codes की जरूरत नहीं रहती है क्योंकि उस Program के Codes पूरी तरह से उस Computer ArchitectureOperating System के आधार पर Binary Form या Machine Codes में Convert हो जाते हैं, जिन्हें बिना Source Codes के बार-बार Execute किया जा सकता है।

ये Compiled Codes पूरी तरह से Machine Dependent होते हैं, इसलिए जिस Architecture के लिए किसी Program को Compile किया जाता है, उस Architecture के अलावा किसी भी अन्य Architecture पर वह Compiled Program Run नहीं होता।

यदि हम किसी अन्य Platform पर उस Program को Execute करना चाहें, तो हमें उस नए Computer Architecture व Operating System के लिए उस Program के Source Codes को फिर से Compile करना पडता है।

चूंकि Compiled Codes पूरी तरह से Machine Dependent होते हैं और पूरी तरह से Native Machine के अनुसार Converted होते हैं, इसलिए Compiled Programs के Execute व Run होने की Speed तेज होती है, क्योंकि इन Programs को बार-बार Machine Codes में Convert होने की जरूरत नहीं होती है।

जबकि दूसरी प्रकार की Programming Languages को Interpreted या Interpreter Based Programming Language कहा जाता है। JavaScript, PHP, Perl, आदि Interpreter Based Programming Languages हैं। इस प्रकार की Programming Languages में बने Programs को जब भी Execute किया जाता, इन Programs के Source Codes हर बार Current Computer Architecture व Operating System के अनुसार Machine Codes में Convert होते हैं और Program Execution के बाद समाप्त हो जाते हैं। यानी यदि किसी Interpreter Based Program को Run करना हो, तो हमें हर बार इन Programs के Source Codes की जरूरत पडती है।

चूंकि Interpreter Based Programming Languages को हर बार Machine Codes में Convert होना पडता है, इसलिए इन Programming Languages की Speed Compiled Programs की Speed की तुलना में कुछ कम होती है। लेकिन Interpreter Based Programming Languages का एक फायदा भी है और वो फायदा ये है कि इन Programming Languages में बने Programs किसी भी Platform या Computer Architecture पर निर्भर नहीं होते इसलिए किसी भी प्रकार के Computer Architecture व Operating System पर आसानी से Run हो जाते हैं, क्योंकि ये हर बार Interpret होते हैं यानी इनका Interpreter इन Programs को हर बार Current Computer Architecture व Operating System के अनुसार Native Machine Codes में Convert करता है।

Interpreter Based Programming Languages को ही Scripting Language भी कहा जाता है और PHP एक Scripting Language है, क्योंकि जब भी हम किसी PHP Program को Execute करते हैं, वह PHP Program अपने Interpreter पर Parse होता है और अपनी Coding के अनुसार Appropriate Results Generate करता है।

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