Inheritance in C++

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Inheritance in C++: OOP में Inheritance Class के बाद दूसरा सबसे बडा Center Concept है। Inheritance Reusability को सम्भव बनाता है। इसकी वजह से हम एक ही Class को बार-बार अलग-अलग स्थितियों में उपयोग में ले सकते हैं और हमें बार-बार एक ही प्रकार के Code नहीं लिखने पडते हैं। Function Libraries की तरह ही Class Library बनाकर हम एक ही Class को कई बार उसी प्रकार से Use कर सकते हैं जैसे कि Library Functions को कई बार Use किया जा सकता है।

Inheritance in C++: The Reusability

हमेंशा हर Program में कुछ काम ऐसे होते हैं जिन्हें थोडा बहुत परिवर्तन के साथ करना ही पडता है। उदाहरण के लिए आज हम GUI वातावरण के Program लिखते हैं। इन सभी Programs में किसी ना किसी हद तक कुछ Menus, कुछ Standard Tool Buttons, कुछ Window या Forms आदि लगभग सभी Programs में समान होते हैं।

OOPS से पहले हर Program के लिए हर Source File में इनकी Coding को लिखना पडता था जो लगभग सभी Source File में समान होते थे। इसके लिए ज्यादातर बार किसी पिछले Program की Coading को Copy करके नए Program की Source File में Paste किया जाता था। अपनी आवश्‍यकतानुसार Source Coding में परिवर्तन किया जाता था और Program को फिर से Compile करके उपयोग में ले लिया जाता था।

लेकिन अक्सर होता ये था कि जब पुराने Program की Coding को नए Program में Copy किया जाता था तो आवश्‍यकतानुसार विभिन्न परिवर्तन करने पर Program में वापस Bugs आ जाते थे जिन्हें फिर से Debug करना पडता था। कई बार तो Bugs निकालने में इतना समय लग जाता था कि Programmer को लगता था कि यदि उसने पूरी Coding ही फिर से कर ली होती, तो भी उतना समय नहीं लगताए जितना पुरानी Coding को Debug करने में लग रहा है। यानी पुरानी Coding को Use करना एक बडी समस्या के समान था और Programmers हमेंशा ये चाहते थे कि उन्हें एक ही प्रकार की Coding बार-बार ना करनी पडे।

Program के Bugs को Reduce करने व पुरानी Coding को Use करने के लिए Programmers Functions Created करने लगे। Functions की ये विशेषता होती है कि इन्हें एक ही बार Debug करके कई बार उपयोग में लिया जा सकता है। विभिन्न प्रकार के कामों के लिए विभिन्न प्रकार के Functions लिखे जाते थे और उन्हें एक Bundle के रूप में Reuse करने के लिए Functions की Library बना ली जाती थी। इन्हीं Functions की Library को “C” भाषा में Header Files कहा गया।

हालांकि Function Libraries काफी हद तक Reusable Codes प्रदान करते थे लेकिन इनकी समस्या ये थी कि इनके द्वारा Real World Objects को Computer में Logically Represent नहीं किया जा सकता था, क्योंकि Functions Libraries महत्वपूर्ण Data को Include नहीं करते थे। साथ ही एक Function को नए Program में अच्छी तरह से Use करने के लिए उनमें Modifications भी करने पडते थे।

चूंकि Functions के रूप में Companies Source Code प्रदान करते थे जिन्हें एक Programmer अपनी आवश्‍यकतानुसार Modify कर सकता था लेकिन जब Programmer उन्हें Modify करता था तो उसे वापस उन Functions के Bugs को Debug करना पडता था।

OOPS के Concept द्वारा एक नया तरीका सामने आया जिससे Re-Usability काफी सरल हो गई और ये तरीका था Class Libraries का। क्योंकि एक Class Real World Object को अच्छी तरह Modal करता है। इसलिए इसे नए वातावरण में उपयोग में लेने के लिए इसमें ज्यादा Modification करने की आवश्‍यकता नहीं होती है।

OOPS हमें एक ऐसा तरीका प्रदान करता है जिससे बिना Class के Coding को परिवर्तित किए हुए Class को Modify किया जा सकता है और फिर से उपयोग में लाया जा सकता है। ये विशेषता OOPS में Inheritance Concept के कारण हमें प्राप्त होती है।  इस Concept में किसी पुरानी Class (Base Class) कहते हैं, उसे Modify नहीं करना होता है बल्कि एक नई Class (Derived Class) बनायी जाती है और उसमें पुरानी Class के सभी Features को Derive कर लिया जाता है साथ ही अपनी आवश्‍यकतानुसार नए Features को भी इस नई Class में Add कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को OOPS में Inheritance कहते हैं।

*this Object
Composition: A "Has a" Relationship

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