Web Development Fundamentals. How we develop web applications?

HTML5 with CSS3 in Hindiये Article इस वेबसाईट पर Selling हेतु उपलब्‍ध EBook HTML5 with CSS3 in Hindi से लिया गया है। इसलिए यदि ये Article आपके लिए उपयोगी रहा, तो निश्चित रूप से ये पुस्तक भी आपके लिए काफी उपयोगी साबित होगी। 

HTML5 with CSS3 in Hindi | Page: 481 | Format: PDF

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हम Web को दो हिस्सों में Divide कर सकते हैं।

  • Web Site
  • Web Application

Website सामान्यतया Advertisement के लिए उपयोगी होती है जबकि Web Application, Data को Manage करने के लिए उपयोगी है।

यदि हम Web को अन्य तरीके से Categories करें, तो हम फिर से Web को दो हिस्सों में बांट सकते हैं:

  • Front End
  • Back End

हम एक Website को भी दो हिस्सों में बांट सकते हैं :

  • Static Web Site
  • Dynamic Web Site

Dynamic Website को भी दो हिस्सों में बांट सकते हैं :

  • Client Side Dynamic
  • Server Side Dynamic

Client Side Dynamic Websites को Interactive Website भी कहते हैं। सामान्यतया इस प्रकार की Websites में Client Side में JavaScript या इसके किसी Framework का प्रयोग करके Front End को Interactive बनाया जाता है। जबकि Server Side Dynamic Website में Webpage पर दिखाई देने वाले Contents User की जरूरत के आधार पर Server से बनकर Client Web Browser में Display होते हैं।

Client Side के Web Browser में User के सामने दिखाई देने वाला Web Page, Front End कहलाता है, जबकि उस Front End को Generate करने वाला अथवा उसमें Modification करने वाला Owner Website के जिस हिस्से को Access करता है, उसे Back End कहा जा सकता है।

Website का दिखाई देने वाला हिस्सा भी तीन भागों में बांटा जा सकता है :

  • Structure of Web Page
  • Style of Web Page
  • Behavior of Web Page

Webpage के Structure को तय करने का काम HTML का होता है।
Webpage के Appearance को Define करने का काम CSS का होता है।
Webpage को Interactivity व Dynamic बनाने का काम JavaScript का होता है।

Website के Back End को दो हिस्सों में बांटा जा सकता हैः

  • Server Side Scripting Language
  • Server Side Database

Server Side की Scripting Language के रूप में सामान्यतया ASP, PHP, JSP आदि का प्रयोग किया जाता है, जबकि Website से संबंधित Data को जिस Software में Store किया जाता है, उसे Database Software कहा जाता है, जो कि सामान्यतया SQL या MySql होता है।

Client Side से आने वाले Data को किस प्रकार से Process करना है, इस बात का निर्णय Server Side Scripting Language लेता है और Data को Process करने के बाद उसे जहां Store किया जाता है, वह DBMS Software होता है।

इनके अलावा Web Browser सामान्यतया Client Software होता है जबकि Web Server, Server Software होता है। Client किसी Resource की Request करता है और Web Server उस Request को पूरा करके Client को उसका वांछित Resource उपलब्ध करवाता है।

Basic Structure of Web Browser and Elements Functionalities

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