Oracle Schemas in Hindi

Oracle Schemas in Hindi – Developers की नजर में Database एक ऐसा System होता है, जो User को विभिन्न प्रकार के Database Objects Provide करता है। Developer का View Schemas पर आधारित होता है। Oracle में जितने भी Users होते हैं, उन सभी का एक Schema होता है, जो कि Database के विभिन्न Objects को Group करने का एक तरीका होता है, ताकि हर User अपने Database Objects को अन्‍य Users से सुरिक्षत रख सके।

Users

बिना एक User NamePassword के, हम Oracle Database में Log On नहीं हो सकते हैं। Oracle अपने हर User व उसके Encrypted Password का ध्‍यान रखता है। जब हम एक नया User Create करते हैं, उस User से Associated एक Schema Create होता है और User उस Schema के किसी भी Object को Access करने में सक्षम होता है। फिर भी एक नया User Database के किन Objects को Access कर सकने में सक्षम होगा] उस User को इस बात से सम्बंधित कुछ अधिकार दिए जाते हैं। हर नया User अपनी उन Limitations के अन्तर्गत ही किसी Database को Access करने में सक्षम होता है। हर User के लिए Oracle में एक Session Create करना व उसे Tablespace के कुछ हिस्से को Access करने की सुविधा देना Privileges Allow करना कहलाता है। Tablespace के इस Allowed Memory Space को Quota कहा जाता है।

Tables

Tables किसी भी Data के Fundamental Storage Unit होते हैं। इनमें Rows व Columns होते हैं। Schema के हर Table का एक Unique नाम होता है। Table के हर Column का भी एक Unique नाम होता है जो कि एक Data Type जैसे कि NUMBER या DATE से Associated होता है। Tablespace में जितनी भी Tables होती हैं, वे एक या एक से ज्‍यादा Data Files के बीच बिखरी हुई हो सकती हैं। Table के Extents को Locate करने के लिए dba_extentsdba_data_files Views का प्रयोग किया जा सकता है।

Indexes

Indexes एक दूसरा Schema Object होता है, जो अपने स्वयं के Segment में Store होता है। Indexes Create करने का Most Common तरीका B-Trees को Use करना होता है।

Clusters

Clusters विभिन्न Database Tables को Store करने का एक Alternative तरीका होता है। Clusters का प्रयोग करके हम Data के Disk पर Physically Store होने के तरीके को Control कर सकते हैं, ताकि हम Database की Performance को बढ़ सकें और Data के Streams को उस तरीके से प्राप्त कर सकें] जिस तरीके से Data Index File में Store होते हैं।

जब हम Cluster Segment Create करते हैं, तब हम Cluster Column को Identify करते हैं। जब हम Tables Create करते हैं, तब हम ये Indicate करते हैं कि हम उन Tables को किस Cluster में रखना चाहते हैं। जब हम किसी Table को किसी Cluster में Add करते हैं, तो Cluster व Table दोनों में एक समान Columns होने जरूरी होते हैं। Table की Rows वास्तव में Physically Cluster Index Order में Store होते हैं, इसलिए उन्हें Hashing Algorithm के आधार पर भी Store किया जा सकता है। हम किसी Cluster में कई Tables Store कर सकते हैं, लेकिन हमें ऐसा तभी करना चाहिए, जब वे सभी Tables एक साथ Use की जाती हों। सामान्‍यतया Clusters का प्रयोग नहीं किया जाता है, क्‍योंकि Performance का फायदा केवल तभी होता है, जब Clusters में स्थित Tables Static हों।

Sequence Generators

ये एक ऐसा Built-In तरीका होता है, जिसका प्रयोग Unique Sequential Numbers Create करने के लिए किया जाता है। इसका मुख्‍य Purpose Tables को Unique Keys Provide करना होता है, क्‍योंकि Oracle में Autonumber जैसी कोई सुविधा नहीं होती है, जैसी की MS-Access में होती है। इसका प्रयोग बिना किसी परेशानी के एक से ज्‍यादा Users द्वारा किया जा सकता है, जबकि किसी दूसरे तरीके से ये Number Create करने पर Locking से सम्बंधित समस्या का सामना करना पड सकता है।

Procedures

Oracle हमें ऐसे Procedural Codes लिखने की सुविधा देता है, जिन्हें हम Database में Store करके रख सकते हैं। इन Procedures को PL/SQL Language में लिखा जाता है। ये हमें Procedures, Functions व Database Triggers लिखने की सुविधा देता है। Triggers वे Code Blocks होते हैं, जो Table पर किसी Action के Perform होने पर Automatically Execute हो जाते हैं।

Views

ये एक ऐसा Predefined तरीका होता है, जिसके द्वारा हम उन एक या एक से अधिक Joined Tables के Data को देख सकते हैं, जिन्हें Base Tables कहते हैं। ये MS-Access की Query के समान होते हैं। Views का प्रयोग Base Tables की Information को Hide करने के लिए किया जा सकता है, जिसके द्वारा Users को Base Tables के केवल कुछ Columns को ही Access करने की सुविधा Provide किया जाता है। इसका एक सबसे बडा फायदा ये है कि यदि Base Tables में नए Files Create किए जाए, तो भी Views को Modify करने की जरूरत नहीं होती है। वे बिना Modify किए हुए भी ठीक उसी प्रकार से काम करते हैं, जिस तरह से Base Tables में नए Columns को Add करने से पहले करते थे। इनका प्रयोग करके कई Tables को Join करने की Complexity को भी Hide किया जा सकता है।

हम Views का प्रयोग भी ठीक उसी तरह से कर सकते हैं, जिस तरह से Base Tables का करते हैं। यानी हम Views पर भी उसी तरह से SELECT, INSERT, UPDATE व DELETE Commands को Apply कर सकते हैं, जिस तरह से Base Tables पर करते हैं, हालांकि ऐसा करने पर हमें कुछ Restrictions को ध्‍यान में रखना होता है।

Synonyms

Synonym किसी भी Schema Object का एक दूसरा नाम यानी Alias होता है। Oracle में हम किसी Table, View, Procedure या Sequence को एक दूसरा Alias भी प्रदान कर सकते हैं। Synonyms Public या Private हो सकते हैं और इनका प्रयोग Schema के किसी Object के Names को Security के कारणों से Hide करने के लिए किया जा सकता है। Synonyms को Microsoft का ODBC Support नहीं करता है, इसलिए इसे हम सामान्‍य तरीके से Visual Basic जैसे किसी Client Software में Use नहीं कर सकते हैं।

हालांकि Oracle की सभी Internal Details को पूरी तरह से समझाना काफी मुि”कल है। साथ ही जब हम Oracle को Practically Development के लिए Use करते हैं, तब हमें इन Details की जरूरत भी नहीं होती है। फिर भी हमें इस बात की General जानकारी होनी चाहिए कि Oracle क्या और कैसे कर रहा है। Oracle के काम करने की पूरी प्रक्रिया को हम निम्नानुसार समझ सकते हैं:

  • सबसे पहले DBA Database के Start-Up Procedure को Initiate करता है, जो कि
  • Initialization File से Parameters को Read करता है।
  • SGA को Memory Allocate करता है।
  • Required Processes को Start करता है।
  • Control Files को Open व Read करता है।
  • Database की Data Files को General Access के लिए Open करता है।
  • फिर DBA एक Listener Process Start करता है और User-Connection के लिए Request करता है।
  • एक Visual Basic Connection Database से ODBC Network या OLE Oracle Object द्वारा Database से Connection स्थापित करता है।
  • फिर Listener Process एक Server Process को User के SQL Requests को Handle करने के लिए Dispatch करता है।
  • Visual Basic Application एक SQL Statement को Database पर Pass करता है।
  • SQL Statements के लिए Shared Pool का एक Area Allocate किया जाता है।
  • यदि Database Buffer Cache में कोई Data ना हो, तो Required Data को इसमें Pull किया जाता है।
  • Memory में किए गए किसी भी Change व Store किए गए किसी भी Change की Entry Redo Log Buffer में की जाती है।
  • Control फिर से Visual Basic Client Application को एक Appropriate Result के साथ Return होता है।
  • जब कोई Criteria मेल करता है, तब Database Writer Process Data Changes को फिर से Disk पर Write कर देता है।
  • जब Changes को Commit किया जाता है, तब Log Writer इन Changes को Redo Log Files में Write कर देता है।

इस तरह से एक Visual Basic Client व Oracle Server के बीच का Communication Perform होता है। (Oracle Schemas in Hindi)


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