क्‍यों Delay हो रही है “Android in Hindi” की EBook?

पिछले लम्‍बे समय से ढ़ेरों OLD BUYERS ये सवाल पूछ रहे हैं और सभी को अलग-अलग जवाब देना और समझाना काफी कठिन हो रहा है। इसलिए ये Post केवल इसी सवाल का जवाब Clear करने के लिए है। Android in Hindi EBook के Delay होने के दो कारण हैं- पहला Direct और दूसरा Indirect Direct कारण ये है कि Android एक Core Java + XML + Android APIs + Event Driven Programming Model based GUI + DBMS + Design Patterns + So Many … [Read more...]

4 दशक बाद भी आखिर C/C++ क्‍यों हैं हमारे Syllabus में?

Why Learn C / C++ : आज विभिन्‍न प्रकार की जरूरतों को पूरा करने के लिए ढे़र सारी Modern and Advanced Programming Languages का विकास हो चुका है लेकिन फिर भी O-Level से लेकर MCA, M. Tech. व PhD तक के Syllabus में किसी न किसी रूप में C/C++ Programming Language को Included रखा गया है। क्‍यों? सरलतम शब्‍दों में इस क्‍यों का जवाब यही है कि C का विकास होने से पहले भी ढे़र सारी अन्‍य Programming … [Read more...]

Jobs in IT Sector for Freshers – किस Category से हैं आप?

Jobs in IT Sector for Freshers - पिछले Article “Career in IT Sector” पर उम्‍मीद के मुताबिक ढेरों Comments, SMS, WhatsApp व Emails आए लेकिन जैसाकि मैंने पहले भी कहा कि एक-एक को Personally Guide करना मेरे लिए Practically Possible नहीं है क्‍योंकि सभी की समस्‍याऐं मोटे तौर पर काफी अलग व Personal हैं। लेकिन थोड़ा गहराई से विचार करने पर पाया कि भले ही ज्‍यादातर लोगों की अपने Career के प्रति समस्‍याऐं … [Read more...]

क्‍या आप भी अपने IT Career को लेकर Confused हैं?

Career in IT Sector - सामान्‍यत: जितने भी नए Software Developers बनते हैं वे पूरी तरह से Fresher होते हैं। यानी BCA, BSc. IT/CS, PGDCA, MSc. MCA आदि Degree Level Courses Complete करके जल्‍दी से जल्‍दी किसी न किसी कम्‍पनी में Job पाना चाहते हैं लेकिन सच्‍चाई ये होती है कि 3 से 5 साल का Degree Level Course करने के बावजूद 95% से ज्‍यादा Students को ये तक पता नहीं होता कि Software क्‍या होते हैं, … [Read more...]

Don’t wait for the Right Job. Just get it.

जॉब प्राप्‍त करने के हमेंशा से दो तरीके रहे हैं – डिक्‍लेरड् वैकेन्‍सीज् का इन्‍तजार करना। अनडिक्‍लेरड् जॉब्‍स् को प्राप्‍त कर लेना। सामान्‍यतया 99% लोग पहले तरीके को अपनाते हैं। वे अखबार, रोजगार समाचार पत्र-पत्रिकाओं आदि में कम्‍पनियों की जॉब वैकेन्‍सीज् के विज्ञापन का इन्‍तजार करते हैं। कुछ ज्‍यादा समझदार लोग इंटरनेट का सहारा लेते हैं और Nokari.com, Monster.com आदि जॉब साईटस् पर … [Read more...]

Brand Your Identity through Your Website.

आज किसी भी Product या Service को बेचना बहुत ही मुश्किल काम है क्‍योंकि एक ही Product या Service को बहुत सारे Businessman बेचने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी वजह से व्‍यापारियों की आपसी प्रतिस्‍पर्धा बहुत ज्‍यादा हो गई है और ग्राहक इस प्रतिस्‍पर्धा का पूरा फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। आज के इस जबरदस्‍त प्रतिस्‍पर्धावादी युग में कोई भी Business केवल उसी स्थिति में ज्‍यादा से ज्‍यादा तरक्‍की कर सकता … [Read more...]

Web Developer Vs Web Designer. The Difference…

जैसाकि नाम से ही समझ सकते हैं कि Web Designer किसी भी Website के Design यानी Look and Feel अथवा Webpage के Layout, Structure व Architecture को तय करता है। अन्‍य शब्‍दों में कहें तो वह इस बात को तय करता है कि कोई Website कैसी दिखाई देगी, कौनसा Content कहां Place किया जाएगा। कौनसा Content Heading बनेगा और किस Content को Sub-Heading या Paragraph की तरह Display किया जाएगा। Website में किन … [Read more...]

Learning English is easy than learning Hindi. How?

क्‍या वास्‍तव में English सीखना ज्‍यादा आसान है हिन्‍दी सीखने की तुलना में क्‍योंकि एक International Survey में ये बात साबित हुई है कि हिन्‍दी सीखना तुलनात्‍मक रूप से ज्‍यादा कठिन है English सीखने के, विषेश रूप से उन लोगों के लिए, जिनकी मातृ भाषा यानी घर में व आप-पडौस में बोली जाने वाली मूल भाषा हिन्‍दी नहीं है और यही वजह है कि स्‍वयं भारत में भी हिन्‍दी भाषा को सभी लोग बोल, समझ, लिख व पढ नहीं … [Read more...]