Designing The Database Application

Designing The Database Application – Database का Design बनाने के बाद हम Application को Design करने के लिए तैयार होते हैं। ये भी एक Iterative Process होता है और हमें हमारे Application को कई बार Refine करना पडता है साथ ही कई बार हमें हमारे Database को भी जरूरत के आधार पर फिर से Modify करना पडता है। Application को Design करते समय हमें जितना हो सके उतना उन End-Users को Designing Process में Involve करना होता है, जो हमारे Application को Use करने वाले होते हैं।

Application Design करने के बाद जितना जल्दी हो सके, उतना जल्दी हमें उस Application को End-Users तक पहुंचाना होता है, ताकि End-Users उस Application को Use कर सके और यदि Application में उन्हें कहीं कोई परेशानी आती है, तो वे उन परेशानियों से हमें अवगत करा सकें और हमारे Application को फिर से Fine-Tune कर सकें।

Enforcing Security

हमारे Application का Designing Process तब तक Complete नहीं होता है, जब तक कि हम हमारे Application की Security Related Requirements को Identify नहीं करते हैं। हम हमारे Application में किस User Group को Application के किस हिस्से को और किस हद तक Access करने की सुविधा दे सकते हैं, इस Step में हमें यही  Identify करना होता है।

हमेंशा हमें इस बात के लिए सावधान होना होता है कि End-User Application को कभी भी उसकी Limitations से ज्‍यादा Access ना कर सके, क्‍योंकि हमें हमेंशा ये मान कर चलना होता है कि Application को Use करने वाला User Application System को पूरी तरह से नहीं जानता है। इसलिए यदि User Application को आवश्‍यकता से अधिक छोडने की कोशिश करता है, तो उस स्थिति में उसका Important Data Lost हो सकता है।

End-User Application को उतना ही Use कर सके, जितना उसे करना चाहिए, इस बात को तय करने के लिए हमें हमारे Application में कुछ Security Settings भी करनी होती है। ऐसा करने पर केवल हम ही Application को पूरी तरह से Administrator के रूप में Access कर सकते हैं और Application को गलत तरीके से Access करने के कारण पैदा होने वाली परेशानियों से बचा सकते हैं।

Performance Tuning

Application Develop करते समय हमें Application की Performance को जरूरत के हिसाब से Tune करना पडता है। Application को Tune करने के दो तरीके होते हैं:

  • Application के Design को Tune करना।
  • हमारे Application के वे तरीके व SQL Statements जो कि Data को Access करने का काम करते हैं, उन तरीकों व SQL Statements की Tuning करना।

Maintaining and Updating

यदि हम किसी पहले से Exist Application को Upgrade करना चाहते हैं, या एक ऐसा नया Application Create करना चाहते हैं, जो पहले से Existing Database पर Run होता है, तो हमें उपरोक्त विभिन्न Steps को Use करना पडता है। हमें हमारे End-User की जरूरत को Identify करना पडता है व समझना पडता है और फिर जरूरत को ध्‍यान में रखकर Application को Design करना पडता है। एक Database Administrator के रूप में हमें निम्न बातों को भी तय करना पडता है:

  • पहले से Exist Application किस तरह से और क्या काम करता है?
  • कौनसा Data Available है?
  • क्या उनमें से किसी Data को Eliminate किया जा सकता है या किसी नए Data को Add किया जा सकता है?
  • क्या Database के Structure में कोई Modification करना पडेगा? यदि Database के Structure को Change करना जरूरी है, तो किस प्रकार से ये Change किया जाए, ताकि पहले से Stored Data को किसी प्रकार का कोई नुकसान ना हो।
Designing the Database
Types of Database Designs - Conceptual, Logical and Physical Schemas

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