Designing the Database

Designing the Database – पहले Step को पूरा करने के बाद इस दूसरे Step में हमें हमारे Application के Data-Model को Design करना होता है। ये Model हमें इस बात को तय करने की सुविधा देता है, कि हम हमारे Data को कितने Efficient तरीके से Store व Use कर सकते हैं। किसी Real-World System को Relational Database Management System के रूप में Map करने के लिए सामान्‍यतया Entity-Relationship Model को Use किया जाता है।

ER-Model किसी System के सभी Elements जैसे कि Person, Place या Things को अथवा दो Entities के बीच की Relationship को Categorize करता है। इस Model में EntitiesRelationships दोनों को Tables के रूप में ही Represent किया जाता है।

उदाहरण के लिए Order Entry System में OrderItem दोनों Entity के रूप में होते हैं, जिन्हें Tables के रूप में Represent किया जाता है। अब किस Order में किस Item की Request की गई है, इस बात की Relationship को Represent करने के लिए भी एक Third Table बनाया जाता है। किसी Application के Entity-Relationship Model को Create करने के लिए हमें निम्न Steps को Follow करना होता है:

  • हमारे Application System से सम्बंधित Required Entities को Identify करना।
  • हर Entity के उन Attributes को पहचानना, जिन्हें Database में Store करना है और उन Attributes के आधार पर हर Entity को Represent करने वाली Table Create करना।
  • विभिन्न Entities के बीच की आपसी Relationship को Represent करने के लिए हमारे Application System से सम्बंधित विभिन्न Entities की Tables में Modification करना या नई Relationship Table Create करना।

जब हम हमारे Application System की Modeling Entity-Relationship Model के आधार पर करते हैं, तब हमें अक्सर Normalization नाम के एक Step को Modeling Process में Include करना होता है। ज्‍यादातर परिस्थितियों में Database को Third Normalization Form तक Normalize किया जाता है। Third Normal Form में हर Table में केवल एक Primary Key होती है और हर Table के सभी Attributes केवल उसी Table के Primary Key पर Depend होते हैं।

ER Model पर आधारित एक Proper Application में सभी Tables एक Well Designed Form में प्राप्त होती हैं। एक Well Designed Table से हमें निम्न Benefits प्राप्त होते हैं:

  • एक ही Data बार-बार Store नहीं करने पडते हैं, जिससे Storage की बचत होती है साथ ही Data के Duplications से Generate होने वाली विभिन्न प्रकार की परेशानियां पैदा नहीं होती हैं।
  • विभिन्न प्रकार के Integrity Constraints को Tables पर Apply करने के कारण Database की Abilities बढ़ जाती हैं।
  • Database को Future की जरूरतों को पूरा करने के लिए आसानी से Modify करने की सुविधा प्राप्त होती है। (Designing the Database in Hindi)
Database Application Development Process - Finding the Requirements
Designing The Database Application

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Oracle 8i/9i SQL/PLSQL in Hindi | Page: 587 | Format: PDF

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