What is Internet and How it Works?

What is Internet and How it Works? अभी तक हमने Internet को क्‍यों और कैसे विकसित किया गया, इस विषय में कुछ Basic जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की लेकिन Internet वास्तव में क्या है और कैसे काम करता है, इस विषय में अभी तक हम कुछ भी नहीं जानते।

तो चलिए! अब हम इस विषय में भी थोडा विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं कि क्या और कैसे काम करता है Internet?

सामान्यत: Internet को नेटवर्कों का नेटवर्क भी कहा जाता है जहां Internet Interconnected Computer Networks का एक Global System होता है जो Internet Protocol Suite (TCP/IP) का प्रयोग करते हुए दुनियांभर के करोडों Devices को आपस में Connect कर देता है। लेकिन ये परिभाषा आपको तभी ठीक से समझ में आएगी जबकि आपको पता हो कि वास्तव में Network होता क्या है?

दो या अधिक Devices जब एक दूसरे के साथ Wired या Wireless तरीके से Connect होते हैं और एक दूसरे के साथ Communicate करते हुए एक दूसरे के Resources यानी विभिन्न प्रकार के Data को आपस में Share करने में सक्षम होते हैं, तो इस प्रकार से Connected Devices के Architecture को Network कहा जाता है।

उदाहरण के लिए जब आप अपने Smart Phone के Camera से Click किए गए Photos को अपने Computer में Copy करने के लिए उसे USB Cable के माध्‍यम से अपने Computer से जोडते हैं, तो आपका Smart Phone व आपका Computer, दोनों आपस में मिलकर एक Network Form कर रहे होते हैं। यानी एक Local Network बना रहे होते हैं जबकि इस Local Network में केवल दो Devices (Smart Phone and Computer System) ही Included हैं।

इसी तरह से जब आप अपने Smart Phone में Stored Images या Songs को अपने किसी मित्र के साथ Share करने के लिए उसके Smart Phone से Bluetooth या Wi-Fi के माध्‍यम से Connection स्थापित करते हैं, तब भी आप एक Network Form कर रहे होते हैं।

यानी Wired या Wireless, किसी भी तरीके को माध्‍यम के रूप में Use करते हुए यदि दो या अधिक Devices आपस में Connected हों, तो वे Devices आपस में एक Network को ही Represent करते हैं।

अब मानलो कि यदि हम विभिन्न प्रकार की उन Devices, जो कि आपस में Data Sharing के लिए Connect होकर Network Form करने में सक्षम हों, को छोटे-छोटे Networks की एक श्रृंखला के रूप में Connect करें, तो हम ढेर सारे छोटे-छोटे Networks को मिलाकर एक बडा Network भी Form कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए मानलो कि किसी School की Computer Lab में 10 Computers हैं जो कि आपस में एक-दूसरे के साथ जुडे हुए हैं और किसी शहर में ऐसे 10 Schools हैं, जहां प्रत्येक School के 10 – 10 Computers का अपना Local Network है।

अब यदि इन सभी स्कूलों के 10 – 10 Computers के छोटे-छोटे Networks को आपस में Connect कर दिया जाए तो Form होने वाले यानी बनने वाले Network में Exist Nodes की कुल संख्‍या 10 x 10 = 100 होगी और यदि इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 10 शहरों के 10 स्कूलों को आपस में जोड दिया जाए जिनकी Computer Lab में 10 – 10 Computers आपस में Local Network के रूप में Connected हैं, तो अब इस Network में Exist कुल Nodes की संख्‍या 10 x 10 x 10 = 1000 होगी।

इसी क्रम को यदि और आगे बढ़ाया जाए और दुनियां के प्रत्येक छोटे से छोटे Network को आपस में Connect कर दिया जाए तो उस स्थिति में जो Network बनेगा, उसे ही Internet कहते हैं। इस प्रकार से अब यदि हम Internet को परिभाषित करें तो-

Internet वास्तव में ढेर सारे Interconnected Devices का समूह है, जो कि आपस में या तो Wire के माध्‍यम से अथवा Wireless (Wi-Fi, Bluetooth, Infrared, Radio Wave or, Satellites) तरीके से Connected हैं और एक दूसरे के साथ Data Sharing करने में सक्षम हैं।

इसी बात को यदि दूसरे शब्दों में कहें तो-

Internet वास्तव में आपस में Directly या Indirectly Connected Physical Hardware Devices का Group होता है और ARPANET या TCP/IP के रूप में Define किए गए Protocols के आधार पर काम करता है।

Internet का विभिन्न Internet Supported Devices जैसे कि Computer, Mobile, Tablet आदि पर दिखाई देने वाले World Wide Web से Directly कोई सम्बंध नहीं है। बल्कि यदि हम ये कहें कि World Wide Web को Exist होने के लिए Internet की जरूरत है, लेकिन Internet के Exist होने के लिए World Wide Web की जरूरत नहीं है, तो गलत नहीं होगा। क्‍योंकि World Wide Web वास्तव में Internet के माध्‍यम से अथवा Internet के Top पर Run होता है और यदि Internet Exist न हो, तो Web का अस्तित्व ही सम्भव नहीं है।

इसीलिए Internet का विकास 1969 के आसपास हुआ था तथा 1974 तक Internet लगभग पूरी तरह से तैयार था, जबकि Web का विकास 1989 के आसपास होना शुरू हुआ था, जब 1988 में Internet Public Access हेतु तैयार हो रहा था और 1993 में पूरी तरह से विकसित रूप में Public Domain में यानी लोगों के लिए उपयोग करने हेतु उपलब्ध हुआ था।

अत: Internet वास्तव में केवल Web (World Wide Web) नहीं है, बल्कि Web के Exist होने के लिए Internet जरूरी है अन्‍यथा Web नहीं हो सकता लेकिन Internet, बिना Web के भी Exist हो सकता है और 1974 से 1988 तक Internet बिना Web के भी Exist था तथा Email, NewsgroupTelephone Exchange के रूप में उपयोगी भी था।

हालांकि Internet को मूल रूप से ARPA द्वारा ही Develop किया गया था लेकिन धीरे-धीरे अन्‍य देशों का ध्‍यान भी इस Networking तकनीक पर गया और कुछ और देशों ने इस Networking Concept पर काम करना शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप यूरोप की IBM Company ने x.25 आधारित BITNET नाम का Networking Protocol Develop किया। जबकि Bell Labs में UUCP नाम का Networking Protocol Develop किया गया।

इसी तरह से और भी कई देशों ने अपने अलग-अलग Networking Protocols Develop किए। लेकिन क्‍योंकि ARPA सबसे पहला व सबसे बडा Network था, इसलिए विभिन्न देशों ने जिन कुछ Specific Networking Protocols को Develop किया था, धीरे-धीरे उन सभी को ARPA के TCP/IP Suite में Observe कर लिया गया।

परिणामस्वरूप कई प्रकार की Different Devices के लिए बनाए गए Different प्रकार के Networking Protocols को अन्त में एक Standard TCP/IP Network Protocol Suite में सम्मिलित कर लिया गया जिसकी वजह से Different Countries में Develop किए गए Different ProtocolsDevices के बावजूद सभी TCP/IP Suite की वजह से आपस में एक दूसरे के साथ Connect होने में सक्षम हो गए और Internet का हिस्सा बने, जिसकी वजह से Internet के Network का विकास बहुत ही तेज गति से होना सम्भव हो पाया।

Internal Working of ARPANET Protocol
Why and How the World Wide Web Developed

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