Why and How the Internet Developed – Core JSP in Hindi

Why and How the Internet Developed – सामान्यत: लोग InternetWorld Wide Web अथवा सरल शब्दों में कहें तो Web को एक ही मान लेते हैं, जबकि इन दोनों में मूलभूत रूप से बहुत अन्तर है। हालांकि ये दोनों ही एक दूसरे से पूरी तरह से जुडे हुए हैं और दोनों की स्वतंत्र कल्पना करना अथवा दोनों को स्वतंत्र रूप से परिभाषित करना लगभग असम्भव है। लेकिन फिर भी इन दोनों के बीच के अन्तर को ठीक से समझने के लिए हमें थोडा इतिहास में जाना होगा, लगभग 2 सदी पहले के इतिहास में, क्‍योंकि Internet के विकास की नींव वहीं से रखी गई थी।

Why and How the Internet Developed

सन् 1836 में Telegraph तकनीक का विकास किया गया था, जिसके अन्तर्गत Dash व Dot की श्रृंखला जिसे Morse Code के नाम से जाना जाता है, के माध्‍यम से Information को दो दूर Locations के बीच Transmit किया जाना सम्भव हुआ लेकिन इस Dash व Dot की श्रृंखला ने अनजाने में ही हमारे आज के Computer System व Internet की नींव भी रख दी थी क्‍योंकि वर्तमान समय के Computer System की सम्पूर्ण तकनीक 0 और 1 के रूप में Binary Codes पर ही आधारित हैं और ये Binary Codes, Morse Codes से ही प्रेरित हैं। अन्तर केवल इतना है कि Morse Codes के Different Patterns अंग्रेजी के विभिन्न अक्षरों को Represent करते थे, जबकि Binary Digits के Different Combinations न केवल अंग्रेजी के विभिन्न अक्षरों को बल्कि Images, Graphics, Audio व Video आदि अन्‍य प्रकार के Data को भी Represent करने में सक्षम हैं।

चूंकि Morse Codes द्वारा Coded संदेशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए एक माध्‍यम की जरूरत होती थी, इसलिए पूरे अटलांटिक महासागर में Cables का जाल बिछाया गया ताकि विभिन्न महाद्वीपों के बीच आपस में Communication स्थापित किया जा सके क्‍योंकि उस समय लगभग ज्यादातर देशों पर अंग्रेजों का राज था और अपने साम्राज्‍य को सुचारू रूप से चलाने हेतु विभिन्न प्रकार की Information को Morse Codes के माध्‍यम से तेज गति से Send/Receive होना अंग्रेजों के लिए काफी उपयोगी था।

अटलांटिक महासागर में Cables को बिछाने का काम 1858 से 1866 के दौरान किया गया जिससे लगभग सभी महाद्वीप आपस में Morse Codes के माध्‍यम से जुड गए लेकिन जल्दी ही इस Morse Codes के लिए बिछाई गई Cables की उपयोगिता Morse Code Devices के लिए समाप्त हो गई क्‍योंकि 1978 में Graham Bell ने Telephone का आविष्‍कार कर दिया और अटलांटिक महासागर के बीच जिन Cables को Morse Codes Transmission के लिए बिछाया गया था, वे अब Telephone के लिए Use होने लगी।

लेकिन Morse Codes Transmission के लिए बिछाई गई Cables की उपयोगिता केवल Telephone Lines तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि 1957-58 के आसपास दो अलग Locations पर स्थित Computer Networks को आपस में जोडने के लिए इन्हीं Telephone Lines को फिर से Use किया गया और इस बार जिस तकनीक के लिए इन Telephone Lines को फिर से Reuse किया गया था, उसे आज हम Internet के नाम से जानते हैं जबकि हो सकता है कि निकट भविष्‍य में इन्हीं Cables को फिर से किसी और नई तकनीक के लिए भी Use किया जाने लगे।

आज हम जिस Internet को देखते हैं वह वास्तव में दुनियाभर में (World Wide) फैले हुए बहुत सारे Interconnected Computer Networks की एक श्रृंखला है जो कि कुछ Standard नियमों (Protocols) के आधार पर Packet Switching नामक प्रक्रिया द्वारा एक Computer के Data को दूसरे Computer में Send/Receive करने के लिए विकसित किए गए हैं।

इसीलिए Internet को सामान्यत: WWW यानी World Wide Web के नाम से भी जाना जाता है क्‍योंकि Internet दुनियांभर (World Wide) के Computer Networks का एक जाल (Web) ही है। Internet की श्रृंखला में आने वाले विभिन्न Computer Networks लोगों के लिए बिना किसी Restriction के Publicly Available व Accessible रहते हैं। इसलिए हम जब चाहे तब किसी भी Network से अपनी वांछित Information प्राप्त करके उसे उपयोग में ले सकते हैं। अत: यदि बिल्कुल ही सरल शब्दों में कहें, तो Internet वास्तव में बहुत सारे छोटे-छोटे कम्प्यूटर नेटवर्को से मिलकर बना हुआ बडा Network है।

लेकिन सवाल ये है कि आखिर Internet को विकसित ही क्‍यों किया गया?

इस सवाल का तो कोई निश्चित जवाब नहीं है लेकिन एक बात जरूर बिल्कुल निश्चित है कि जिस Internet व Web को हम आज देख रहे हैं व जिन जरूरतों को Internet द्वारा आज पूरा किया जा रहा है, मूल रूप से Internet का प्रयोग करते हुए उन जरूरतों को पूरा करने के बारे में तो सोंचा भी नहीं गया था बल्कि ये जरूरतें तो Side-Effect के रूप में ही पूरी हो रही हैं।

चलिए! समझने की कोशिश करते हैं कि आज हम जिस Internet को देख रहे हैं व अपने दैनिक जीवन में जाने-अनजाने उपयोग में लेते हुए विभिन्न प्रकार की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, आखिर उस Internet को किस जरूरत को पूरा करने के लिए Develop किया जा रहा था और किस तरह से Internet अपनी आज की स्थिति को प्राप्त कर सका।

आज Internet को हम जिस विस्‍तृत व विशाल रूप व आकार में देख रहे हैं, वह शुरू से ही इतना बडा नहीं था न ही Public के लिए Available था, बल्कि वास्तव में Internet एक Secret Military Project के रूप में Develop किया गया Program था, जिसका नाम Semi Automatic Ground Environment (SAGE) था और इस Project का मुख्‍य उद्देश्‍य एक ऐसा Country-Wide Radar System बनाना था जो कि पूरी तरह से Distributed Network पर आधारित हो।

Internet के विकास का कारण उन्नीसवीं सदी के अन्त व बीसवीं सदी की शुरूआत में छिपा है जिस समय विभिन्न देश विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक आविष्‍कार कर रहे थे और उन आविष्‍कारों के माध्‍यम से वे दुनियां भर में सबसे शक्तिशाली देश का वर्चश्‍व प्राप्त करना चाहते थे। इस वर्चश्‍व की लडाई में अमेरिका, रूस, इंगलेण्‍ड, ब्रिटेनए जापान जैसे कुछ देश मुख्‍य रूप से अग्रणी थे। लेकिन जब दूसरे विश्‍वयुद्ध में अमेरिका द्वारा अटम-बम का विकास कर जापान पर उसका सफल परीक्षण किया गया, तो इस वर्चश्‍व की लडाई में अमेरिका सबसे अव्वल स्थान पर पहुंच गया क्‍योंकि उसके पास एटम-बम नाम के ऐसे घातक हथियार को बनाने की तकनीक थी, जो किसी भी अन्‍य देश के पास नहीं थी।

हालांकि अमेरिका के एटम-बम के कारण ही दूसरे विश्‍वयुद्ध का अन्त हुआ था और इसी तकनीक के कारण अमेरिका दुनियां का सबसे शक्तिशाली देश भी बन गया था, लेकिन इस दूसरे विश्‍वयुद्ध के दौरान सभी देशों ने इस बात को अच्छी तरह से समझ लिया था कि अमेरिका जैसे देश से उसी स्थिति में आसानी से जीता जा सकता है, जबकि उसके Information System को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया जाए।

और इस बात को अमेरिका भी बेहतर तरीके से जानता था कि दुनियां में अपने वर्चस्व व अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए किसी भी स्थिति में उसके Information System का ठीक तरह से काम करना जरूरी था, क्‍योंकि दूसरे विश्‍वयुद्ध के अन्त का कारण अमेरिका द्वारा जापान में किया गया परमाणु हमला ही था और अमेरिका को डर था कि शत्रुदेश किसी न किसी तरह से इस परमाणु हमले का बदला लेने की कोशिश जरूर करेंगे जिसकी शुरूआत अमेरिका के Information System को Destroy करने से ही हो सकती थी।

इसलिए अमेरिका ने SAGE नाम के एक Secret Military Project पर काम करना शुरू किया, जिसके अन्तर्गत सारे देश का पूरा Information System केवल किसी एक स्थान पर व केवल किसी एक Computer System पर Stored न करके कई अलग-अलग Locations पर व कई अलग-अलग Computer System में Store किया जाना था। साथ ही एक ऐसी तकनीक को विकसित करना था, जिससे कि इन Computer Systems के बीच Information का जो भी Transmission हो, उसे किसी भी तरीके से Decode न किया जा सके, ताकि यदि किसी कारणवश इस Computer Network को यदि कोई शत्रुदेश Hack भी कर ले, तब भी वह किसी भी तरह की Security Related Information को Crack न कर सके।

अमेरिका अपने Information System को विभिन्न मित्र देशों के बीच इसीलिए Distributed रखना चाहता था, ताकि यदि परमाणु युद्ध की स्थिति में यदि किसी एक देश का Information System पूरी तरह से बर्बाद भी हो जाए तब भी अन्‍य मित्रदेशों के बीच का Communication किसी भी तरह से बाधित न हो और ऐसा केवल एक ही स्थिति में हो सकता था, जबकि सभी मित्रदेशों के Computer Systems आपसे में एक Network के रूप में जुडे हुए हों।

America द्वारा SAGE Project को महत्व देने का एक कारण और भी था जहां हालांकि अमेरिका ने परमाणु बम बनाने की तकनीक का विकास सबसे पहले किया था, लेकिन द्वितीय विश्‍वयुद्ध के समाप्त होने के कुछ ही सालों बाद तक कई और देशों ने भी इस तकनीक को विकसित कर लिया था। लेकिन अमेरिका की चिन्ता तब बढ़ी जब 1958 के दौरान Soviet Union ने Sputnik नाम का पहला Satellite Launch करने में सफलता प्राप्त करते हुए अन्तिरिक्ष पर भी विजय प्राप्त कर ली।

अंतरिक्ष में Satellite भेजने में सफलता प्राप्त करने के कारण सोवियत संघ, तकनीकी के क्षैत्र में अमेरिका से आगे निकल गया था और America Technology के क्षैत्र में फिर से अपना वर्चस्व बनाना चाहता था क्‍योंकि अमेरिका को ये बात बिल्कुल भी पसन्द नहीं थी कि कोई भी अन्‍य देश उससे अधिक शक्तिशाली हो। इसलिए अमेरिका को कोई ऐसी तकनीक विकसित करनी थी, जो उसे फिर से दुनियांभर में सर्वशक्तिमान का पद दे सके और अमेरिका को ये नई तकनीक Networking क्षमता विकसित करने के रूप में ही दिखाई दे रही थी जिसके अन्तर्गत वह न केवल दुनियां में सर्वशक्तिशाली होने का सम्मान प्राप्त कर सकता था बल्कि अपने देश के Information System को भी पूरी तरह से सुरिक्षत कर सकता था।

परिणामस्वरूप United States of America की Military के Defense Department ने SAGE Project के अन्तर्गत Advanced Research Project Agency (ARPA) नामक संस्था का गठन किया किया और इस Department ने जल्दी ही अपना सबसे पहला Network System Protocol विकसित कर लिया जिसे ARPANET के नाम से जाना गया।

यानी ARPANET ही वह पहला Networking तकनीक या Protocol था, जिस पर वर्तमान समय का पूरा Internet System आधारित है जबकि ARPANET Protocol के अन्तर्गत केवल दो Nodes को आपस में Interconnect करने में ही सफलता प्राप्त की गई थी।

Internal Working of ARPANET Protocol

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