Why and How the World Wide Web Developed

Why and How the World Wide Web Developed – हालांकि वर्तमान समय में हम जिस Internet को उपयोग में ले रहे हैं, उसे उपयोग में लेने से सम्बंधित ज्यादातर Protocols 1974 तक पूरी तरह से Develop हो चुके थे। लेकिन फिर भी अमेरिका ने Internet को Public के लिए 1990 तक उपलब्ध नहीं किया था क्‍योंकि इसे अमेरिका ने अपने Information System की सुरक्षा के लिए Develop किया था और मूल रूप से इस पर अमेरिकी Military का एकाधिकार था।

लेकिन जिस मुख्‍य जरूरत को पूरा करने के लिए अमेरिका ने Internet को एक Military Project के रूप में Develop किया था, अब ये उससे कहीं आगे बढ़ चुका था। क्‍योंकि 1990 के दशक तक आते-आते ज्यादातर देशों ने अमेरिका को सर्वशक्तिमान व दुनियां का मुखिया मान लिया था।

साथ ही ज्यादातर देशों ने परमाणु युद्ध का विरोध करते हुए परमाणु तकनीक को युद्ध हेतु नहीं बल्कि देश के विकास के लिए सकारात्मक रूप से उपयोग में लेने हेतु CTBT नाम के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिया था। इसलिए किसी देश द्वारा अमेरिका पर परमाणु हमला करके व उसके Information System को ध्‍वस्त करते हुए उसे पराजित कर दिए जाने जैसी सम्भावनाऐं पूरी तरह से समाप्त हो चुकी थीं, जो कि Internet को Develop करने के पीछे का मूल उद्देश्‍य था।

इसलिए 1980 के आस-पास अमेरिका ने Internet को Public Domain में Use करने हेतु कुछ छूट देना शुरू किया लेकिन अभी भी Internet पूरी तरह से Public के लिए Available नहीं था बल्कि Internet को केवल बड़ी Universities में EducationScientific Research Work हेतु ही Use किया जा सकता था और ऐकाधिकार के रूप में मूल रूप से इसे अभी भी Military व Government के Use के लिए ही उपयोग में लिया जाता था।

चूंकि ARPA द्वारा Developed ARPANET Network, जो कि ARPA का Internal Network था, को अपने Network Development Research Project हेतु जो धन यानी Funding प्राप्त होता था, वह DoD यानी अमेरिका के Department of Defense से प्राप्त होता था, इसलिए पूरा Networking System Develop हो जाने के बावजूद भी ARPA का Network काफी छोटा था।

उसमें से भी MILNET नाम के एक Separate Network को Develop करने के लिए ARPANET से कुछ Nodes यानी Computer Systems को निकालकर MILNET Development Department को दे दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप ARPANET के पूरे Network में कुल 113 Nodes ही थे और ये 113 Nodes भी मूल रूप से DoD द्वारा Funded थे और मूल रूप से विभिन्न Universities व Research Organizations में स्थित थे।

113 Nodes वाले ARPANET का Network इतना छोटा होने के बावजूद भी Networking के Benefits को ज्यादातर आम लोग अच्‍छी तरह से जान व समझ रहे थे, जिनमें अमेरिका का व्यापारी वर्ग मुख्‍य रूप से Interested था और व्यापारी वर्ग के इस Networking Benefits में Interested होने का मुख्‍य कारण वह Service थी, जिसे हम Email के नाम से जानते हैं।

Email एक ऐसी सुविधा थी, जिसे Internet के सबसे पहले Practical Application के रूप में जाना जा सकता है और इस Email Service का विकास ARPANET Protocol के पहले Version के साथ ही 1972 में हो गया था। ये Email Service उन लोगों में बहुत ही तेजी से Popular हुआ था, जो कि ARPANET के Network को Access कर सकते थे, जिनमें मूल रूप से ARPANET से Connected Universities, Education Institutions व Research Centers के लोग शामिल थे और इन्हीं Research Centers में से CERN भी एक था, जो कि ARPANET से Connected था।

चूंकि, CERN एक Nuclear Research से सम्बंधित Organization था, इसलिए विभिन्न प्रकार के Research Papers को विभिन्न Scientists आपस में ARPANET Network द्वारा Share किया करते थे, ताकि सभी वैज्ञानिक Latest Research से Updated रहें और तेज गति से Research कर सकें।

लेकिन ARPANET Network की एक समस्या ये भी थी ARPANET Network के विभिन्न Nodes समान Hardware ArchitectureOperating System Platform को Use नहीं करते थे। यानी ARPANET Network से Connected विभिन्न Research Centers, Universities व Institutions अलग-अलग तरह के Operating System युक्त अलग-अलग ProcessorArchitecture वाले Computers Use करते थे। जिसकी वजह से Research Center के विभिन्न वैज्ञानिकों को अपने Research Work से सम्बंधित Information को आपस में Share करने में काफी परेशानियों का सामना करना पडता था और CERN के Tim Burners Lee नाम के एक वैज्ञानिक Information Sharing की इस समस्या से निजात पाना चाहते थे।

इसलिए 1989 में उन्होंने Different Computer Architecture (Intel, AMD Athelon, Celeron, Motorola, etc…) व Different Operating System (Windows, Linux, Unix, MacOS, etc…) युक्त Computers के बीच Information को आसानी से Share किए जाने हेतु Hypertext के रूप में Typed Text Links के माध्‍यम से Network पर उपलब्ध विभिन्न Information को एक दूसरे से Link करने का Proposal तैयार किया, ताकि किसी एक Research से सम्बंधित विभिन्न Papers व Documents को आपस में Link किया जा सके, ताकि Research Work से सम्बंधित विभिन्न Documents को बार-बार खोजने व अलग-अलग Manage करने की जरूरत न रहे, जिन्हें Different OSArchitecture युक्त Computers से Access व Manage करना अपने आप में काफी मुश्किलभरा काम था।

लेकिन उस समय इस Proposal को CERN के अन्‍य वैज्ञानिकों द्वारा भी कोई विशेष महत्व नहीं दिया गया और एक प्रकार से ये Proposal Fail हो गया। किन्तु Tim ने इस Connected Documents के अपने Concept पर काम जारी रखा और अपने Proposal को और अधिक बेहतर तरीके से Present करते हुए Documents का एक World Wide Web तैयार करने का Proposal Present किया जिसमें विभिन्न Documents आपस में Hypertext Links के माध्‍यम से Connected थे।

Tim द्वारा 1990 में World Wide Web को अपने Proposal में जिस तरह से Describe किया था, वो कुछ निम्नानुसार था जो आज इतिहास का एक हिस्सा है-

“HyperText is a way to link and access information of various kinds as a web of nodes in which the user can browse at will. Potentially, HyperText provides a single user-interface to many large classes of stored information such as reports, notes, data-bases, computer documentation and on-line systems help. We propose the implementation of a simple scheme to incorporate several different servers of machine-stored information already available at CERN, including an analysis of the requirements for information access needs by experiments.”

यानी Tim के अनुसार यदि Internet विभिन्न प्रकार के आपस में Connected Hardware Devices का Physical Collection था, जो कि आपस में Wire या Wireless माध्‍यम से Connected थे, तो World Wide Web विभिन्न प्रकार के Documents का एक Logical Collection था, जो कि आपस में Hypertext Links के माध्‍यम से आपस में Connected होने थे।

1990 में Tim ने अपने इस Hypertext Links के Concept को आगे बढ़ाने के लिए NeXT नाम के Computer, (जिसे Apple Company से निकाले जाने के बाद Steve Jobs द्वारा Launch की गई Next नाम की दूसरी Firm ने बनाया था।) पर WorldWideWeb नाम का पहला Web Browser बनाया और इसका Working Prototype CERN के Server पर Install किया, जो कि कुछ निम्नानुसार दिखाई देता था-

Why and How the World Wide Web Developed - ITeBooks in Hindi

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हालांकि CERN के वैज्ञानिक अब Hypertext Links को Use करते हुए Linked Documents को ज्यादा बेहतर तरीके से Use करते थे, लेकिन ARPANET Network व कुछ गिने चुने लोगों के अलावा बाकी दुनियां के लिए Internet अभी भी पूरी तरह से अनजान था।

हालांकि जो लोग ARPANET Network से जुडे हुए थे, उनमें जो व्यापारी वर्ग था, वे लोग Internet व उसके Commercial Benefits के बारे में काफी कुछ जान व समझ गए थे और 1990 के दशक तक अमेरिका व दुनियां के अन्‍य व्यापारी वर्ग को ये बात पूरी तरह से समझ में आ चुकी थी, कि RadioTelevision के बाद Internet ही एक ऐसा माध्‍यम है, जिसका प्रयोग Business बढ़ाने व अपने व्यापार को केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक में तेजी से फैलाने के लिए Use किया जा सकता है।

इसलिए Military के ऐकाधिकार को खत्म करते हुए Internet को Public Domain में लाने के लिए अमेरिका पर लगभग सारी दुनियां के व्यापारी वर्ग का काफी दबाव था, जिसे अमेरिका Ignore नहीं कर सकता था। इसलिए अन्त में उसे Internet को Public Access के लिए उपलब्ध करवाने हेतु मजबूर होना पडा।

लेकिन Internet को आम लोगों के लिए उपयोग करने हेतु आसानी से Accessible बनाने के लिए एक सुव्‍यवस्थित System की जरूरत थी, क्‍योंकि जो लोग Internet को Commercially Use करना चाहते थे, वे Engineer या Scientist नहीं थे, बल्कि मूलत: व्यापारी वर्ग के लोग थे, जिन्हें Internet की तकनीकी का कोई विशेष ज्ञान नहीं था लेकिन वे इस बात को अच्छी तरीके से जानते थे कि अपने व्यापार को National व International Level पर बढ़ाते हुए ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने हेतु Internet को किस तरह से Use किया जा सकता है।

ऐसे में Internet के रूप में आपस में जुडे हुए दुनियांभर के अनगिनत Networks पर उपलब्ध Information को आसानी से Access करने हेतु उस समय जो सबसे आसान, बेहतर व Latest Developed System था, उसका Prototype CERN में Practically Run हो रहा था, जिसे Tim ने World Wide Web नाम दिया था और अमेरिका द्वारा इसी Prototype को Public Domain द्वारा Internet Access हेतु उपलब्ध करवाया जाना सबसे आसान तरीका था।

परिणामस्वरूप 6 अगस्त 1991 के दिन CERN ने World Wide Web नाम के एक नए Project को Publish किया, जिसे 1989 से 1991 के दौरान Tim Berners-Lee नाम के वैज्ञानिक ने विकसित किया था और इसी World Wide Web Project को हम आज Internet के नाम से जानते हैं, जो कि वास्तव में Internet नहीं है, बल्कि Internet पर Run होने वाला एक प्रकार का Application है, जिसका सही नाम Web यानी World Wide Web है और ये Web वास्तव में Internet पर उपलब्ध विभिन्न प्रकार के Interlinked Documents है, जो कि Hypertext अथवा यदि अन्‍य सरल शब्‍दों में कहें, तो Linked Text के माध्‍यम से Connected है।

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